विजयवर्गीय सेवा सदन में स्वामी रामचरण महाप्रभु के त्रिशताब्दी महोत्सव के तहत चल रहे संगीतमय सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का आयोजन समारोह पूर्वक संपन्न हुआ। सात दिनों तक चलें इस भागवत कथा में चार वेद, पुराण, गीता एवं श्रीमद भागवत महापुराणों की व्याया, अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय रामद्वारा चित्तौडग़ढ़ अधिष्ठाता संत रमताराम रामस्नेही के परम शिष्य अंतर्राष्ट्रीय संत दिग्विजय राम रामस्नेही के मुखारवृंद से श्रवण कर उपस्थित भक्तगण गदगद हुए। संत दिग्विजय राम ने कथा के माध्यम से सात दिनों तक भगवान श्री कृष्णजी के वात्सल्य प्रेम, असीम प्रेम के अलावा उनके द्वारा की गई विभिन्न लीलाओं का वर्णन कर सुंदर समाज का निर्माण करने के लिए भावी पीढ़ी को प्रेरित किया। सात दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान के सातवें एवं अंतिम दिन संत दिग्विजयराम ने भगवान श्री कृष्ण जी के सर्वोपरी लीला महारास लीला, मथुरा गमन, दुष्ट कंसराजा के अत्याचार से मुक्ति के लिए कंसबध, कुबजा उद्धार, रुक्मिणी विवाह, शिशुपाल वध एवं सुदामा चरित्र का वर्णन कर लोगों को भक्तिरस में डुबो दिया। इस दौरान संत दिग्विजयराम रामस्नेही द्वारा ताललय में एक से बढ़कर एक प्रस्तुत किए गए भक्ति भजनों पर श्रद्धालु नृत्य करने पर विवश रहे। श्रीमद् भगवत कथा के सातवें दिन श्रीकृष्ण भक्त एवं बाल सखा सुदामा के चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि सचा मित्र वही है जो मुसीबत में साथ दें। इसका सटीक उदाहरण है तो कृष्ण सुदामा मित्रता प्रसंग है। उन्होंने विस्तार से बताया कि कृष्ण सुदामा बचपन के मित्र थे, साथ साथ पढ़े थे। एक और द्वारकाधीश बन गए। वही सुदामा भिक्षावृत्ति करके निर्धनता के चलते जीवन यापन कर रहे थे।उन्होंने कहा कि मनुष्य स्वयं को भगवान बनाने के बजाय प्रभु का दास बनने का प्रयास करे, क्योंकि भक्ति भाव देख कर जब प्रभु में वात्सल्य जागता है तो वे सब कुछ छोड कर अपने भक्तरूपी संतान के पास दौडे चले आते हैं। गृहस्थ जीवन में मनुष्य तनाव में जीता है, जबकि संत सद्भाव में जीते हैं।इसके बाद कथा पंण्डाल में भगवान श्री कृष्ण एवं सुदामा के मिलन का सजीव चित्रण करती हुई झांकी प्रस्तुत की गयी तो पूरा पण्डाल भाव विभोर हो गया और श्रद्धालु भगवान श्री कृष्ण के जयकारे लगाए तो समूचा पांडाल गुंजायमान हो उठा। इसके बाद कथा व्यास ने बताया कि दत्तात्रेय ने प्रकृति में विचरण करने वाले 24 जीव जंतुओं को गुरु बनाने के प्रसंग पर चर्चा की तथा प्रेरणा लेने को कहा। सात दिवसीय भागवत कथा में आसपास दूरदराज से काफी संया में महिला-पुरूष भक्तों ने पहुंचकर आंनद लिए। सात दिनों तक इस कथा में पुरा वातावरण भक्तिमय रहा। पुण्यार्जक परिवार रामदत त्रिलोकचंद विजयवर्गीय ने आगंतुकों का आभार जताया। कथा विसर्जन अतिथि समान, महाआरती, प्रसादी वितरण पर हुआ। इस अवसर पर चित्तौड़ रामद्वारा के अधिष्ठाता संत रमताराम रामस्नेही, सीकर रामद्वारा के अधिष्ठाता धर्मीराम रामस्नेही, संस्कृत एकैडमी राजस्थान सरकार निदेशक जगदीश विजय, उद्योग विभाग राजस्थान सरकार के निदेशक रहे जगदीश विजय खंडार वाले, बंशीलाल विजय सरड़ी केकड़ी, बछराज विजय बोटूंदा, शिक्षाविद हरिनारायण विजय, विजयवर्गीय समाज मालपुरा अध्यक्ष मुरलीधर, सवाई माधोपुर अध्यक्ष राधेश्याम, अखिल भारतीय विजयवर्गी महासभा टोंक प्रादेशिक वरिष्ठ उपाध्यक्ष त्रिलोकचंद, महामंत्री सुरेश टहला समेत आसपास दूरदराज के काफी संया में श्रद्धालु उपस्थित थे। मंच संचालन शशिकांत पाठक ने किया।